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मेरा ख़याल

खुलकर मुस्कुराओ रौनक बढ़ाओ ज़िन्दगी के उतार चढ़ाव भूल जाने दो! अंधेरों को खींच कर पीछे रौशनी को बाहर फैल जाने दो !! कहीं जिस्म है टूटता आत्मा कहीं है लहूलुहान! दिलों में न रखो समंदर आँखों से दरिया बह जाने दो!! अंधेरों को खींच कर पीछे रौशनी को बाहर फैल जाने दो !! किस ने क्या कहा किस ने क्या किया क्यों करें परवाह इसकी हम! दिल की सुनो दिल की कहो बाकी सब भूल जाने दो!! अंधेरों को खींच कर पीछे रौशनी को बाहर फैल जाने दो !! कुछ लोग छोड़ गए साथ कुछ रिश्ते नए हैं अभी! क्या मेरा क्या तेरा जज़्बातों की दौलत लुटा जाने दो!! अंधेरों को खींच कर पीछे रौशनी को बाहर फैल जाने दो !! आएंगे कई नए मुकाम अभी मुश्किलों से भरे कितने रास्ते भी! है अगर दिल में भरोसा और होठों पे मुस्कान इम्तिहान ढेरों हो जाने दो!! अंधेरों को खींच कर पीछे रौशनी को बाहर फैल जाने दो !!

कसक

गीली रेत पर लिखा वोह नाम, नरम दुधिया चांदनी से धुला धुला सफ़ेद सीप और छोटे छोटे कंकड़, एक छोटा सा नीला कांच का टुकड़ा! मैना जैसी वह चिड़िया और शाम की ठंडी हवा के मस्त झोंके गवाह अभी भी हैं मेरी बर्बादियों के गर तुम्हे याद न हो आज !! मेज़ पर आधा बिछा हुआ मेरा तौलिया और एक गुलाब फर्श पर गिरा तुम्हारा दुपट्टा और मेरा रुमाल! चादर की सलवटें और तकिये पर काजल का निशाँ झुटलाते हैं तुम्हारी बेवफाई चाहें कोई कुछ भी कहे आज !! मेरे दिल की ख्वाहिशें तुम्हारे अधूरे जज़्बात तुम्हारी नम आँखें और मेरे बाज़ुओं का हार! ज़माने की बंदिशें, रवायतें और तुम्हारा निकाह जज़्ब करके अपने आंसूं और ज़ख्म याद करता हूँ तुम्हें आज !! बेहद याद करता हूँ तुम्हें मैं आज !!!

शब्दों के बिना

रोज़ मेरे पास शब्द चले आते थे बिन बुलाये मेहमान की तरह पर आज जब तुम पास हो मेरे शब्द नहीं मिल रहे मुझे कुछ कहने को ! क्या यूँ ही नहीं चलेगा जैसे नील गगन से अथाह गहरायी लिए नयन तुम्हारे कह जाते हैं बहुत कुछ शब्दों के बिना !!

मुझे तुम याद आती हो

जब कभी देखता हूँ सूरज को निकलते हुए, मुझे तुम याद आती हो ! जब कभी सूरज ढलता है, मुझे तुम याद आती हो !! तन जलने लगता है विरह में , मन बिखर बिखर जाता है ! कोई फुसफुसाता है एक नाम कानों में, और सब्र का प्याला छलक जाता है !! जब भी कोई बादल बरसता है मुझे तुम याद आती हो ! जब कभी सूरज ढलता है मुझे तुम याद आती हो !! कब मिला दे कब जुदा कर दे, कौन जानता है बातें किस्मत की ! मिल कर बिछड़ना , बिछड़ कर मिलना, यही तो रीत है दुनिया की !! जब भी देखता हूँ दो पंछी बिछड़ते हुए मुझे तुम याद आती हो ! जब कभी सूरज ढलता है मुझे तुम याद आती हो !! हार कर गिरते हुए को तुमने ही जीवन की राह दिखाई थी ! तुम्हारा चाँद दिनों का साथ मानो पतझर में बहार आई थी !! जब कभी बैठता हूँ किसी पेड़ की छाओं में मुझे तुम याद आती हो ! जब कभी सूरज ढलता है मुझे तुम याद आती हो !! जब कभी देखता हूँ सूरज को निकलते हुए, मुझे तुम याद आती हो ! जब कभी सूरज ढलता है, मुझे तुम याद आती हो !!

सच होते हैं सपने

सपनों  की दुनिया होती है बड़ी दिलकश  क्या क्या रंग दिखाती है ! प्यार, मोहब्बत की पिचकारी से  अंग अंग रंग जाती है !! देखो जितने सपने दिल चाहे सबके सच होने कि शर्त मत रखना ! दिल, दिमाग, बदन और आत्मा का मिलन है जितना मिल जाये उस में खुश रहना !! सच्चे मन से चाहो तो क्या नहीं है मुमकिन  कभी कभी तो गैर भी बन जाते हैं अपने ! श्वेत हृदय से माँगा था जो तुमने  तो देख लो सच होते हैं सपने !!

यह नज़दीकियां

आँसुओं से नहीं लिखी जाती तक़दीरें ख्यालों से नहीं होती पूरी तदबीरें! हसरतों को न जाने कितने पर लगा कर  मिटाईं हैं मैंने तेरे मेरे बीच की सरहदें !! तू आज किसी और की आँखों का ख्वाब सही अश्क़ सदा से है तू मेरी ही आँखों का! न जाने कितने बरस बीते हैं तेरे दीदार को अक्स तेरा अब भी हमसाया है मेरी रूह का !! बना दें जितनी भी दूरियां तुमसे यह दुनिया खींच दें कितनी भी लकीरें नक्शों पर ! कैसे जुदा कर सकेंगे तुम्हे मुझसे जब साँसे लेता हूँ मैं तेरी दिल की धड़कनो पर !! मेरे जज़्बात मेरी हसरतें मेरी गुस्ताख बेबाकियाँ अमानत हैं तुम्हारी, जो हूँ समेटे अपने आगोश में ! कहीँ किसी शहर किसी मकान में तुम ने भी फैला रखी होगी खामोशियाँ मेरी अपने आँगन में !!

चाहतों की चूड़ियाँ

चाहतों  की चूड़ियाँ पहन के आओ बैठो मेरे पास कुछ पल ! पूछें अपने दिल का हाल तुम्हारे दिल की धडकनों से हम !! बताएँ कुछ आपबीती सुने कुछ ज़बानी तुम्हारी ! पोंछे आंसूं तुम्हारे अपने होठों से साँसे मिला लें कुछ तो जी लें !! दोहराएँ वोह कसमें वोह वादे भरोसा हो मोहबत का फिर से ! चलें बादलों के ऊपर हम मिलन हो जिस्म ओ आत्मा का !! चाहतों  की चूड़ियाँ पहन के आओ बैठो मेरे पास कुछ पल ! भूल दुनिया कि रस्में बना ले आज की रात सुहागन हम !!