मेरा पैगाम

वाकिफ़ हूँ इज़हार -ए - तमन्ना की हर अदा से
देख  मेरे  इश्क की गहराई मेरी निगाहों में।
सूरत न दिखा भले ही मेरी ज़िन्दगी के मालिक
भेज दे अपना तस्सुवर मेरे ख्वाबों में।।

चाहा है तुम्हे इस कद्र दिल ओ जान से
कुबूल कर लो मेरा पैगाम अपनी धडकनों में।
मैंने तो मान लिया है तुम्हे अपना खुदा
नाम सुनता हूँ  तुम्हारा आरती और अज़ान  में।।

रुसवाई का डर है गर तुम्हे मेरी बातों  से
न दो जवाब मेरी गुस्ताख बेबाकियों का।
एक नज़र भर देख लेना मुस्कुरा कर मेरी तरफ
जब निकले मेरा जनाज़ा तुम्हारी गलियों में।।






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