तुम्हारी निशानी

कल रात एक किताब के पन्नो में,
गुलाब की कुछ सूखी पंखुडियाँ मिल गयीं।
दिल के टूटे हुए हज़ार टुकड़ों में से,
मानो कोई चंद टुकड़े लौटा दे!

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